Sunday, May 29, 2022
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J&K में बढ़ती चुनावी सरगर्मी के बीच सुरक्षा इंतजाम मजबूत करने पर जोर, खुफिया एजेंसियों ने LoC को लेकर किया अलर्ट


नई दिल्लीः जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir elections) में होने वाले आगामी चुनावों के मद्देनजर निर्वाचन आयोग के अलावा सुरक्षा अधिकारी भी विस्तृत रूपरेखा तैयार करने में जुटे हुए हैं. जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के आर्टिकल 370 के खत्म होने के बाद राज्य में पहली बार चुनाव होने हैं. इसके लिए फिलहाल परिसीमन (Delimitation) का काम चल रहा है. इसके मद्देनजर सेना, पुलिस महानिदेशकों और खुफिया अफसरों की टॉप लेवल मीटिंग में राज्य पर फोकस करने के निर्देश दिए गए हैं. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने खुद कमान संभाल रखी है. आतंकवादियों और उनके हमदर्दों पर शिकंजा कसने और सुरक्षा व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त करने को कहा गया है. खुफिया एजेंसियों ने सीमापार के आतंकियों को लेकर आगाह किया है.

जम्मू कश्मीर में चुनाव नए परिसीमन के आधार पर कराए जाएंगे. परिसीमन आयोग लंबे समय से इसमें जुटा हुआ है और अब उसका काम लगभग पूरा हो चुका है. परिसीमन के मसौदे पर जनता की आपत्तियां लेने के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा. संभावना है कि मई तक ये काम खत्म हो जाएगा. उसके बाद सुरक्षा हालात को देखते हुए विधानसभा चुनाव कराए जाएंगे. चर्चा है कि अक्टूबर में चुनाव हो सकते हैं. पिछले महीने न्यूज18 के साथ इंटरव्यू में गृह मंत्री अमित शाह ने भी कहा था कि एक बार परिसीमन की कार्यवाही पूरी हो जाए, उसके 6 से 8 महीने के अंदर चुनाव हो जाएंगे. इसे लेकर कोई कन्फ्यूजन नहीं है.

अमित शाह ले चुके महीने में दो बार बैठक
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू कश्मीर के सुरक्षा इंतजाम का जायजा लेने के लिए पिछले हफ्ते राज्य का दौरा भी किया था. इस दौरान उनकी एलजी मनोज सिन्हा के अलावा टॉप सुरक्षा अधिकारियों के साथ बैठक हुई थी. राज्य के पुलिस प्रमुख दिलबाग सिंह ने कानून व्यवस्था को लेकर अमित शाह को ब्रीफ किया था और पावरपॉइंट प्रजेंटेशन भी दिया था. इससे पहले, गृह मंत्री शाह ने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पिछले महीने दिल्ली में बैठक ली थी. इसमें एलजी मनोज सिन्हा और राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल, आर्मी चीफ एमएम नरावणे और इंटेलिजेंस ब्यूरो के डायरेक्टर अरविंद कुमार भी शामिल हुए थे.

रिस्क नहीं लेना चाहती सरकार
जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव इस बार बदले हालात में होंगे. राज्य में बरसों से जिन राजनीतिक दलों का दबदबा था, वह अब किनारे लग चुके हैं. आतंकी घटनाओं में कमी आई है. सीमापार से घुसपैठ की कोशिशें भी कम हुई हैं. गृह मंत्रालय की ओर से संसद में बताया गया था कि पिछले साल पाकिस्तान की तरफ से जम्मू कश्मीर में घुसपैठ के 34 प्रयास हुए थे, जबकि 2018 में इनकी संख्या 143 थी. लेकिन सरकार चुनाव से पहले कोई रिस्क नहीं लेना चाहती. स्थानीय स्तर पर आतंकी खतरा अभी खतम नहीं हुआ है. लोकल आतंकी और उनके लिए काम करने वाले लोग अब भी एक्टिव हैं. आतंकियों के ओवरग्राउंड वर्कर्स की गिरफ्तारी के लिए सुरक्षा बल विशेष अभियान चला रहे हैं. खुफिया एजेंसियों ने सीमापार के आतंकियों को लेकर आगाह किया है, जो चुनाव में खलल डालने की पूरी कोशिश करेंगे. अफगानिस्तान में तालिबान शासन आने का भी असर कश्मीर में दिखने की आशंका जताई जा रही है.

Tags: Jammu kashmir



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