Tuesday, May 18, 2021
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MLC लड़े कौन, चुनाए कौन-अब इसमें फंसेगा पेच: चुनाव वाली 1 सीट डेढ़ साल, दूसरी 3 साल की, मनोनयन वाली 6 साल की, सहनी-अशोक का नाम लड़ने वालों में


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पटना2 घंटे पहलेलेखक: शालिनी सिंह

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VIP के मुकेश सहनी और जदयू के अशोक चौधरी।

अरुणाचल प्रदेश में भाजपा के हाथों जदयू के 7 में से 6 विधायकों की टूट से NDA का बिगड़ा समीकरण दुरुस्त हो चुका है। भास्कर ने दो दिन पहले यह भी बता दिया था कि जदयू ने 50:50 पर बात मनवा ली है। अब ताजी खबर यह है कि मुख्यमंत्री आवास में NDA नेताओं के बीच मंत्रिमंडल विस्तार और विधान परिषद की सीटों का बंटवारा लगभग तय होने के बाद भी एक जगह मामला फंसने वाला है। फंसने वाली बात यह है कि विधान परिषद् की एक सीट पर VIP कोटे के मंत्री मुकेश सहनी और जदयू कोटे के मंत्री डॉ. अशोक चौधरी को चुनाव लड़ाने की बात फाइनल हो रही है, लेकिन इनमें सुशील मोदी वाली खाली पड़ी एक सीट डेढ़ साल के लिए है और विनोद नारायण झा वाली दूसरी 3 साल की। परिषद की मनोनयन वाली 12 सीटें 6 साल के लिए हैं।

मनोनयन की 6-6 सीटें बांट रहे सत्ताधारी दोनों अगुआ
विधान परिषद में राज्यपाल कोटे की 12 सीटों में से अब 6 सीटें भाजपा को और 6 सीटें जदयू को मिलेंगी। वही मंत्रिमंडल में पहले तय हुए फॉर्मूले पर ही नया कैबिनेट विस्तार भी होगा। यानी वह विभाग जो भाजपा के मंत्री देख रहे हैं, वह भाजपा के खाते में रहेंगे और जो जदयू के मंत्री देख रहे हैं वह जदयू के खाते में। इसके साथ ही सुशील कुमार मोदी के राज्यसभा सांसद बनने और विनोद नारायण झा के विधायक बनने के बाद खाली हुई बिहार विधान परिषद की 2 सीटों में से भी भाजपा जदयू को 1 सीट देगी।

विधायक कोटे की सीटों पर मुकेश साहनी और अशोक चौधरी जाएंगे परिषद
सुशील कुमार मोदी के राज्यसभा जाने और विनोद नारायण झा के विधायक बनने के बाद खाली हुई बिहार विधान परिषद की दोनों सीटों से भाजपा जदयू के 1-1 मंत्री परिषद में जाएंगे। सुशील मोदी के परिषद की सदस्यता का कार्यकाल 2024 में खत्म होना था, जबकि विनोद नारायण झा का कार्यकाल परिषद में 2022 तक बचा हुआ था। माना यह जा रहा है कि सुशील मोदी की राज्यसभा जाने से खाली हुई परिषद की सीट पर मंत्री मुकेश साहनी बिहार विधान परिषद जाएंगे, जबकि विनोद नारायण झा के विधायक बनने से खाली हुई सीट भाजपा जदयू को देगी, जिस पर मंत्री अशोक चौधरी के परिषद पहुंचने की संभावना है।

राज्यपाल कोटे से बिहार विधान परिषद जाने वाले संभावित नाम
बिहार विधान परिषद की ऐसी 12 सीटें पिछले 1 साल से खाली हैं, जिन पर राज्यपाल कोटे से मनोनयन किया जाता है। इन 12 सीटों को लेकर बिहार विधानसभा चुनाव के पहले से ही जबरदस्त सियासत होती रही है। पार्टियों के नेता लगातार इसको लेकर अपने आलाकमान की गणेश परिक्रमा करते रहे हैं। इन 12 सीटों पर दोनों पार्टियों में सैकड़ों दावेदार हैं, लिहाजा दोनों ही पार्टियों का नेतृत्व इसे अपने लिए तुरुप का पत्ता मान रहा है। वैसे लोग, जो चुनाव जीत नहीं पाए या जिनका टिकट कट गया, उन सभी को अब भी इन सीटों के जरिये विधानमंडल तक पहुंचने का रास्ता दिखाई दे रहा है। यही नहीं, इन सीटों के जरिये सीधे कैबिनेट मंत्री बनने का भी मौका मिल सकता है। यही वजह है कि चाहे भाजपा हो या जदयू, दोनों के नेता इसको लेकर जबरदस्त लॉबिंग में लगे हुए हैं। लेकिन इन सबके बावजूद अब तक भाजपा और जदयू की तरफ से जिन नेताओं की दावेदारी इन पर सबसे मजबूत मानी जा रही है उनमें से कुछ संभावित नाम ये हैं-

भाजपा से

  • बेबी कुमारी : पूर्व विधायक बेबी कुमारी बोचहा से विधायक रही थी, लेकिन उन्हें इसलिए टिकट नहीं मिला, क्योंकि वह सीट मुकेश सहनी की पार्टी VIP को चली गई थी। लिहाजा ऐसा माना जा रहा है कि उन्हें विधान परिषद भेजा जाएगा।
  • अनिल शर्मा : पार्टी में लंबे समय से जुड़े अनिल शर्मा भूमिहार समाज से आते हैं और भूमिहार कोटे से वह MLC पद के एक प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। हालांकि उन्हीं की पार्टी के देवेश कुमार को भी MLC पद का संभावित उम्मीदवार माना जा रहा है।

VIP से मुकेश साहनी

  • बिहार विधानसभा चुनाव में NDA का हिस्सा बने और फिर कैबिनेट में मंत्री बने मुकेश साहनी भाजपा को मिलने वाली विधान परिषद की हिस्सेदारी के हिस्सेदार हैं। विधानसभा चुनाव के दौरान ही भाजपा ने उन्हें MLC का एक पद देने का वादा किया था।

हम से दानिश रिजवान

  • जीतन राम मांझी की पार्टी हम के प्रवक्ता दानिश रिजवान को MLC के पद का बड़ा दावेदार माना जा रहा है। जदयू की तरफ से हम को दी जाने वाली MLC पर उन्हें बिहार विधान परिषद भेजा जाएगा।

जदयू

  • जदयू की तरफ से MLC बनने की रेस में जो नाम शामिल हैं, वे हैं- संजय गांधी, ललन सर्राफ, अशोक चौधरी।



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