Sunday, June 26, 2022
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Pushkar Singh Dhami फिर बने उत्तराखंड के मुख्‍यमंत्री, जानें कैसे चढ़ीं छात्र नेता से राजनीति की सीढ़ियां


देहरादून. Pushkar Singh Dhami New Uttrakhand CM- भाजपा की विधायक दल की बैठक के बाद पर्यवेक्षक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) और सह पर्यवेक्षक मीनाक्षी लेखी (Meenakshi Lekhi) ने पुष्कर सिंह धामी के सर्वसम्मति से नेता चुने जाने का ऐलान किया. इसके साथ उत्तराखंड को 12वां मुख्यमंत्री मिल गया है. हालांकि पार्टी की राज्‍य में ऐतिहासकि जीत के बाद भी मुख्यमंत्री धामी अपनी खटीमा विधानसभा सीट नहीं बचा पाए. यही वजह रही कि भाजपा को सीएम का नाम फाइनल करने में 11 दिन का वक्‍त लगा. इस दौरान पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष जेपी नड्डा से लेकर पीएम नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत कई नेताओं ने दिल्‍ली में मंथन किया.

यही नहीं, नए सीएम के नाम की कवायद में उत्तराखंड भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, वरिष्ठ नेता सतपाल महाराज और पूर्व केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक से भी हाईकमान का विचार विमर्श हुआ. इसके बाद सोमवार को देहरादून में धामी का विधायक दल का नेता चुना गया है.

कौन हैं पुष्कर सिंह धामी
46 साल के धामी भाजपा के युवा नेता हैं और उत्तराखंड में अभी तक बने सभी मुख्यमंत्रियों में सबसे युवा हैं. धामी का जन्म साल 16 सितंबर, 1975 को राज्य के सीमांत जिले पिथौरागढ़ की तहसील डीडीहाट के टुण्डी गांव में हुआ है. वहीं, जब वह पहली बार सीएम बने थे तब ऊधम सिंह नगर की खटीमा विधानसभा सीट से दूसरी बार विधायक बने थे, लेकिन इस बार वह चुनाव हार गए. धामी का ताल्लुक सैन्य परिवार से रहा है और वे तीन बहनों के भाई हैं. उनके पिता पूर्व सैन्य अधिकारी थे.

धामी की शुरुआती शिक्षा गांव में हुई और हायर एजुकेशन लखनऊ यूनिवर्सिटी से की है. पुष्कर धामी मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएट हैं. धामी को पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में महाराष्ट्र और गोवा के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी का करीबी माना जाता है. लेकिन उनकी छवि एक निर्विवाद नेता की रही है.

एबीवीपी से होते हुए सीएम के पद तक पहुंचे धामी
पुष्कर सिंह धामी साल 1990 से 1999 तक जिले से लेकर राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) में विभिन्न पदों में रहे. इसी दौरान अलग-अलग पदों के साथ-साथ प्रदेश मंत्री के तौर पर लखनऊ में हुए एबीवीपी के राष्ट्रीय सम्मेलन में संयोजक की भूमिका निभाई थी. उत्तराखंड राज्य गठन के बाद धामी सीएम भगत सिंह कोश्यारी के सलाहकार रहे. पुष्कर धामी 2002 से 2008 के बीच लगातार दो बार भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे. इसके अलावा वह उत्तराखंड भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष भी रहे हैं. पुष्कर सिंह धामी 2012 में खटीमा से विधायक चुने गए और उसके बाद 2017 में फिर से विधायक चुने गए.

इस वजह से पिछली बार मिली थी सीएम की कुर्सी
भाजपा ने त्रिवेंद्र सिंह रावत और तीरथ सिंह रावत को बदलते हुए पिछले कार्यकाल में धामी पर दांव खेला था. यही नहीं, 57 विधायकों की संख्या होने के बावजूद भाजपा ने तीन-तीन मुख्यमंत्री बदल डाले थे. ऐसे में पार्टी की ज्यादा किरकिरी न हो इसलिए धामी पर दांव खेला गया. इसके साथ ही धामी से पहले बने दो मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और तीरथ सिंह रावत का संबंध गढ़वाल से रहा है. साथ ही बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक का संबंध गढ़वाल मंडल के हरिद्वार जिले से है. ऐसे में भाजपा आलाकमान ने राजपूत बिरादरी से ताल्लुक रखने वाले कुमाऊं के नेता पुष्कर सिंह धामी पर दांव खेलना सही समझा था, ताकि कुमाऊं और गढ़वाल को बैलेंस किया जा सके. जबकि 2022 में भाजपा का ये दांव सही साबित हुआ है. आखिर हर बार सत्‍ता बदलने का दौर इस बार थम गया है. इसके अलावा वह न केवल युवा और ऊर्जावान हैं बल्कि भाजपा ने पहाड़ी राज्य में उनके नाम पर चुनाव लड़ा था और शानदार जीत दर्ज की. जबकि पिछले कार्यकाल में बेहद कम समय मिलने के बाद भी उन्‍होंने भाजपा के प्रति जनता के विरोध को थाम लिया था. यही नहीं, युवाओं और महिलाओं में धामी का बहुत क्रेज है.

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Tags: Amit shah bjp, BJP chief JP Nadda, Pm narendra modi, Pushkar Singh Dhami, Rajnath Singh, Uttarakhand Assembly Elections, Uttarakhand CM



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