Saturday, May 8, 2021
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RBI Policy LIVE: ब्याज दरों में नहीं हुआ कोई बदलाव, सस्ती EMI के लिए करना होगा इंतजार


RBI गवर्नर शक्तिकांत दास (RBI Governor Shaktikanta Das)

RBI Monetary Policy LIVE Updates: छह सदस्य वालों मौद्रिक नीति समिति (MPC-Monetary Policy Committee) ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    October 9, 2020, 10:08 AM IST

मुंबई. 7 अक्टूबर को शुरू हुई एमपीसी (RBI Monetary Policy Committee (MPC) Meeting) बैठक का फैसला आ गया है.  भारतीय रिजर्व बैंक (RBI-Reserve Bank of India) के गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikant Das) की अध्यक्षता वाली छह सदस्य वालों मौद्रिक नीति समिति (MPC-Monetary Policy Committee) ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है. रेपो रेट 4% पर बरकरार है. MPC ने सर्वसम्मति से ये फैसला किया है. रिवर्स रेपो रेट 3.35 फीसदी पर बरकरार है.

आरबीआई क्रेटिड पॉलिसी के दौरान रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट और सीआरआर जैसे शब्द जरूर सुने होंगे. पर क्या आप इन शब्दों के मतलब जानते हैं. आज हम आपको इसका मतलब और मायने बता रहे हैं. रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया की आर्थिक समीक्षा नीतियों से जुड़े इन शब्दों के बारे में जानिए.

रेपो रेट-रेपो रेट वह दर होती है जिस पर बैंकों को आरबीआई कर्ज देता है. बैंक इस कर्ज से ग्राहकों को ऋण देते हैं. रेपो रेट कम होने से मतलब है कि बैंक से मिलने वाले कई तरह के कर्ज सस्ते हो जाएंगे. जैसे कि होम लोन, व्हीकल लोन वगैरह.

रिवर्स रेपो रेट-जैसा इसके नाम से ही साफ है, यह रेपो रेट से उलट होता है. यह वह दर होती है जिस पर बैंकों को उनकी ओर से आरबीआई में जमा धन पर ब्याज मिलता है. रिवर्स रेपो रेट बाजारों में नकदी की तरलता को नियंत्रित करने में काम आती है. बाजार में जब भी बहुत ज्यादा नकदी दिखाई देती है, आरबीआई रिवर्स रेपो रेट बढ़ा देता है, ताकि बैंक ज्यादा ब्याज कमाने के लिए अपनी रकमे उसके पास जमा करा दे.सीआरआर-देश में लागू बैंकिंग नियमों के तहत हरेक बैंक को अपनी कुल नकदी का एक निश्चित हिस्सा रिजर्व बैंक के पास रखना होता है. इसे ही कैश रिजर्व रेश्यो (सीआरआर) या नकद आरक्षित अनुपात कहते हैं.

एसएलआर-जिस दर पर बैंक अपना पैसा सरकार के पास रखते है, उसे एसएलआर कहते हैं. नकदी की तरलता को नियंत्रित करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है. कमर्शियल बैंकों को एक खास रकम जमा करानी होती है जिसका इस्तेमाल किसी इमरजेंसी लेन-देन को पूरा करने में किया जाता है. आरबीआई जब ब्याज दरों में बदलाव किए बगैर नकदी की तरलता कम करना चाहता है तो वह सीआरआर बढ़ा देता है, इससे बैंकों के पास लोन देने के लिए कम रकम बचती है.

एमएसएफ-आरबीआई ने पहली बार वित्त वर्ष 2011-12 में सालाना मॉनेटरी पॉलिसी रिव्यू में एमएसएफ का जिक्र किया था और यह कॉन्सेप्ट 9 मई 2011 को लागू हुआ. इसमें सभी शेड्यूल कमर्शियल बैंक एक रात के लिए अपने कुल जमा का 1 फीसद तक लोन ले सकते हैं. बैंकों को यह सुविधा शनिवार को अलावे हरेक वर्किंग डे में मिलती है.

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